झुंझुनूं में बड़ा प्रशासनिक एक्शन: ग्राम विकास अधिकारी सिद्धार्थ खीचड़ की सेवा समाप्त

झुंझुनूं में ग्राम विकास अधिकारी सिद्धार्थ खीचड़ की सेवाएं समाप्त। परिवीक्षाकाल में पत्नी व रिश्तेदारों के खातों में करोड़ों रुपये का अनाधिकृत हस्तांतरण और नकद गबन जांच में प्रमाणित, जिला प्रशासन का सख्त एक्शन।

Dec 31, 2025 - 09:26
Dec 31, 2025 - 09:26
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झुंझुनूं में बड़ा प्रशासनिक एक्शन: ग्राम विकास अधिकारी सिद्धार्थ खीचड़ की सेवा समाप्त
ग्राम विकास अधिकारी सिद्धार्थ खीचड़

झुंझुनूं में पंचायती राज व्यवस्था पर बड़ा प्रहार: ग्राम विकास अधिकारी सिद्धार्थ खीचड़ की सेवाएँ समाप्त, करोड़ों के गबन की पुष्टि

झुंझुनूं, राजस्थान। पंचायती राज व्यवस्था में सरकारी धन के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला झुंझुनूं जिले में उजागर हुआ है। ग्राम विकास अधिकारी पद पर कार्यरत रहे सिद्धार्थ खीचड़ के विरुद्ध चली विभागीय जाँच में यह तथ्य सामने आया कि उन्होंने अपने परिवीक्षाकाल के दौरान ही सरकारी धन का व्यापक स्तर पर दुरुपयोग किया। जिला परिषद झुंझुनूं के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैलाश चंद्र यादव ने बताया कि जाँच में यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुआ है कि संबंधित कार्मिक ने अपनी पत्नी एवं अन्य रिश्तेदारों के बैंक खातों में क्रमशः ₹46,86,889/- तथा ₹55,92,600/- की राशि अनाधिकृत रूप से हस्तांतरित की। इसके अतिरिक्त ₹66,940/- नकद का गबन भी जाँच में सामने आया है।

परिवीक्षाकाल में ही गंभीर दुराचरण

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, किसी भी सरकारी कर्मचारी के लिए परिवीक्षाकाल एक ऐसा चरण होता है जिसमें उसके आचरण, ईमानदारी और कार्यकुशलता का मूल्यांकन किया जाता है। ऐसे समय में ही यदि कोई कार्मिक करोड़ों रुपये के राजकीय धन का दुरुपयोग करता है, तो यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है बल्कि लोक प्रशासन में विश्वास को भी गहरी चोट पहुँचाता है।

जाँच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि धनराशि का हस्तांतरण किसी वैध योजना, स्वीकृति या भुगतान प्रक्रिया के अंतर्गत नहीं था, बल्कि निजी खातों में किया गया, जो स्पष्ट रूप से वित्तीय अनियमितता और गबन की श्रेणी में आता है।

जिला स्थापना समिति का निर्णय

मामले की गंभीरता को देखते हुए 29 दिसंबर 2025 को जिला स्थापना समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर एवं प्रशासक, जिला परिषद झुंझुनूं डॉ. अरुण गर्ग ने की। बैठक में जाँच रिपोर्ट, दस्तावेजी साक्ष्य और सेवा नियमों के प्रावधानों पर विस्तार से विचार किया गया।

समिति ने सर्वसम्मति से यह माना कि आरोप पूर्णतः प्रमाणित हैं। कृत्य अत्यंत गंभीर दुराचरण की श्रेणी में आता है। परिवीक्षाकाल में ही ऐसा आचरण सेवा में बने रहने के अयोग्य बनाता है। इन तथ्यों के आधार पर ग्राम विकास अधिकारी पद से सेवाएं समाप्त (Termination of Service) करने का निर्णय लिया गया।

प्रशासन का कड़ा संदेश

प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय केवल एक व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह पंचायती राज संस्थाओं में कार्यरत सभी कार्मिकों के लिए एक सख्त चेतावनी है कि सरकारी धन के दुरुपयोग पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में गबन की गई राशि की वसूली, आवश्यकता पड़ने पर आपराधिक कार्रवाई, अन्य वित्तीय लेन-देन की और गहन जाँच जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।

जनहित और पारदर्शिता का सवाल

ग्राम विकास अधिकारी जैसे पद पर कार्यरत कर्मचारी ग्रामीण विकास योजनाओं, रोजगार कार्यक्रमों और बुनियादी सुविधाओं से सीधे जुड़े होते हैं। ऐसे में यदि इसी स्तर पर भ्रष्टाचार होता है, तो उसका सीधा असर गांव के गरीब, किसान और मजदूर वर्ग पर पड़ता है। प्रशासन का यह कदम ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वास बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 मुख्य बिंदु

 पत्नी व रिश्तेदारों के खातों में ₹1 करोड़ से अधिक का अनाधिकृत हस्तांतरण

 नकद गबन की भी पुष्टि

 परिवीक्षाकाल में ही गंभीर वित्तीय दुराचरण

 जिला स्थापना समिति द्वारा सेवा समाप्ति

 पंचायती राज व्यवस्था में जीरो टॉलरेंस का संदेश

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