RTI विवाद: ओबरा नगर पंचायत ने अपीलकर्ता से माँगा स्पष्टीकरण

सोनभद्र के ओबरा नगर पंचायत में RTI अपील के बाद प्रशासन ने ‘अभद्र भाषा’ के आरोप में आवेदक को सात दिन का नोटिस जारी किया।

Dec 17, 2025 - 07:35
Dec 17, 2025 - 07:35
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RTI विवाद: ओबरा नगर पंचायत ने अपीलकर्ता से माँगा स्पष्टीकरण
ओबरा नगर पंचायत ने अपीलकर्ता से माँगा स्पष्टीकरण

सूचना का अधिकार अधिनियम के उल्लंघन के आरोप लगाने वाले आवेदक से सात दिन में स्पष्टीकरण, नगर पंचायत ने ‘अभद्र भाषा’ का लगाया आरोप

सोनभद्र जनपद के ओबरा नगर पंचायत में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत माँगी गई सूचनाओं को लेकर एक गंभीर प्रशासनिक विवाद सामने आया है। यह विवाद अब केवल सूचना उपलब्ध कराने तक सीमित न रहकर कानूनी चेतावनी और संभावित दंडात्मक कार्रवाई तक पहुँच गया है।

ओबरा निवासी अखिलेश जिज्ञासु ने नगर पंचायत ओबरा से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी माँगी थी। इस आवेदन के उत्तर में नगर पंचायत द्वारा दिनांक 28 अक्टूबर 2025 को पत्र संख्या 627/न0पं0ओबरा/2025-26 जारी किया गया। आवेदक का आरोप है कि उक्त उत्तर में सूचना का अधिकार अधिनियम की कई अनिवार्य धाराओं का उल्लंघन किया गया।

अपीलकर्ता के मुख्य आरोप

अखिलेश जिज्ञासु ने दिनांक 26 नवंबर 2025 को धारा 19(1) के अंतर्गत प्रथम अपील दायर करते हुए आरोप लगाया कि-

 लोक सूचना अधिकारी ने अपना नाम व पद स्पष्ट नहीं किया, जो अधिनियम की धारा 26(3)(ख) की भावना के विपरीत है।

 सूचना उपलब्ध कराते समय पृष्ठ संख्या और शुल्क का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया, जिससे धारा 7(3) का उल्लंघन हुआ।

 प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम व पता नहीं बताया गया, जो धारा 7(8) के तहत आवश्यक है।

 सत्यापित प्रतिलिपि देने के बजाय केवल वेबसाइट का हवाला दिया गया, जबकि धारा 2(ज)(2) के अनुसार प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है।

 अपीलकर्ता ने यह भी कहा कि नगर पंचायत द्वारा धारा 4(1)(क) के तहत स्वप्रकाशन (proactive disclosure) का समुचित अनुपालन नहीं किया गया।

अपील में यह माँग भी की गई कि यदि सूचना विस्तृत है तो उसे सीडी या पेन ड्राइव के माध्यम से उपलब्ध कराया जाए तथा सूचना निःशुल्क दी जाए, जैसा कि धारा 7(6) में प्रावधानित है।

नगर पंचायत का पलटवार

इस प्रथम अपील के प्रत्युत्तर में नगर पंचायत ओबरा के अधिशासी अधिकारी द्वारा दिनांक 15 दिसंबर 2025 को पत्र संख्या 788/न0पं0ओ0/2025-26 जारी किया गया। इस पत्र में अपीलकर्ता पर अभद्र भाषा के प्रयोग का गंभीर आरोप लगाया गया है।

अधिशासी अधिकारी ने पत्र में कहा है कि अपीलकर्ता द्वारा भेजे गए पत्र में प्रयुक्त भाषा उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आती है। इसके साथ ही अपीलकर्ता को सात दिवस के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

उठते कानूनी और प्रशासनिक सवाल

यह पूरा प्रकरण कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है-

 क्या सूचना माँगते समय प्रयुक्त भाषा के आधार पर RTI आवेदक के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है?

 क्या प्रशासन को सूचना अधिकार अधिनियम के उल्लंघन के आरोपों पर उत्तर देने के बजाय नोटिस जारी करना उचित है?

 क्या यह कदम भविष्य में RTI आवेदकों के लिए डर का वातावरण पैदा कर सकता है?

सूचना अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि RTI अधिनियम एक संसद द्वारा पारित नागरिक अधिकार कानून है और इसमें सूचना माँगना अपराध नहीं हो सकता, जब तक कि स्पष्ट रूप से आपराधिक भाषा या धमकी न दी गई हो।

ओबरा नगर पंचायत का यह मामला अब केवल एक RTI विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह लोकतांत्रिक पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक अधिकारों से जुड़ा प्रश्न बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अपीलकर्ता का स्पष्टीकरण क्या होता है और प्रशासन आगे कौन-सा कदम उठाता है।

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