निर्दोष को जेल भेजने पर सख्त अदालत: तत्कालीन सीओ पंकज लवानिया समेत 13 पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश
चंदौसी अदालत ने निर्दोष को जेल भेजने के मामले में तत्कालीन सीओ पंकज लवानिया समेत 13 पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश दिए। प्रयागराज में भी लवानिया के खिलाफ फर्जी मुकदमों की जांच चल रही है।
चंदौसी, उ.प्र. | चंदौसी की अदालत ने पुलिसिया मनमानी और सत्ता के दुरुपयोग पर बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विभांशु सुधीर, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ने वर्ष 2022 के एक लूट प्रकरण में निर्दोष व्यक्ति को जेल भेजे जाने को गंभीर अपराध मानते हुए तत्कालीन सीओ बहजोई पंकज लवानिया सहित 13 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने थाना बहजोई को निर्देशित किया है कि तीन दिन के भीतर प्राथमिकी दर्ज कर इसकी सूचना न्यायालय में प्रस्तुत की जाए।
क्या है पूरा मामला
25 अप्रैल 2022 को दुर्वेश पुत्र अज्ञात, निवासी ग्राम अर्जुनपुर जूना, थाना बहजोई, दूध बेचकर लगभग एक लाख रुपये लेकर अपने गांव लौट रहा था। रास्ते में बाइक सवार दो अज्ञात व्यक्तियों ने उसकी बाइक से रुपयों से भरा थैला लूट लिया। इस घटना पर थाना बहजोई में रिपोर्ट दर्ज की गई, जिसकी विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष पंकज लवानिया ने की। कुछ समय बाद विवेचना निरीक्षक अपराध राहुल चौहान को सौंप दी गई। अदालत के अनुसार, विवेचना के दौरान एक षड्यंत्र के तहत ओमवीर नामक व्यक्ति को लूट की घटना में आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया।
अदालत की अहम टिप्पणी
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों, जेल रिकॉर्ड और अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि यह पुलिस पदाधिकारियों द्वारा अपने पद का दुरुपयोग है और निर्दोष व्यक्ति को जानबूझकर जेल भेजा गया।
इन पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश
अदालत के आदेश के अनुसार जिन 13 पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों पर रिपोर्ट दर्ज होगी, उनमें शामिल हैं-
- तत्कालीन सीओ बहजोई गोपाल सिंह
- तत्कालीन एसएचओ बहजोई पंकज लवानिया
- उपनिरीक्षक प्रबोध कुमार
- निरीक्षक अपराध राहुल चौहान
- वरिष्ठ उपनिरीक्षक नरेश कुमार
- उपनिरीक्षक नीरज कुमार मातोदकर
- अदालत से उपनिरीक्षक जमील अहमद
- आरक्षी वरुण, मालती चौहान, आयुष, राजपाल, दीपक कुमार
- तत्कालीन मुख्य आरक्षी रूपचंद्र
प्रयागराज से जुड़ा बड़ा संदर्भ भी आया सामने
यह मामला केवल चंदौसी तक सीमित नहीं है। उल्लेखनीय है कि पंकज लवानिया, जब हंडिया और फूलपुर (प्रयागराज) के सहायक पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात थे, उस दौरान भी उनके निर्देश और नेतृत्व में कई निर्दोष नागरिकों पर फर्जी मुकदमे दर्ज करने, फर्जी गिरफ्तारियां कर जेल भेजने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
इन सभी मामलों की जांच वर्तमान में प्रयागराज के अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. अजय पाल द्वारा की जा रही है। यह तथ्य इस प्रकरण को और अधिक गंभीर, व्यापक और प्रणालीगत बनाता है।
न्यायिक संदेश
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह आदेश उत्तर प्रदेश में पुलिस जवाबदेही के लिहाज से एक महत्वपूर्ण नजीर साबित हो सकता है। यदि विवेचना निष्पक्ष होती है, तो यह फैसला उन पीड़ितों के लिए उम्मीद बनेगा जो वर्षों से फर्जी मुकदमों और पुलिस उत्पीड़न का शिकार रहे हैं।
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