हिंदी मेला के चौथे दिन हिंदी कविता का उत्सव
कोलकाता में 31वें हिंदी मेला के चौथे दिन काव्य आवृत्ति प्रतियोगिता का भव्य आयोजन, शिशु से विश्वविद्यालय स्तर तक प्रतिभागियों की भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ और विजेताओं की घोषणा।
काव्य आवृत्ति प्रतियोगिता में बच्चों से युवाओं तक गूँजी संवेदना, स्मृति और स्वर
कोलकाता। भारतीय भाषा परिषद और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 31वें हिंदी मेला के चौथे दिन हिंदी कविता के सजीव पाठ को समर्पित काव्य आवृत्ति प्रतियोगिता का भव्य और भावनात्मक आयोजन किया गया। यह दिन पूरी तरह हिंदी भाषा, कविता और मंचीय अभिव्यक्ति के नाम रहा, जहाँ शिशु वर्ग से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के प्रतिभागियों ने अपनी स्वर-साधना, भाव-समझ और आत्मविश्वास से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। हिंदीत्तर प्रदेश में आयोजित इस मेले में जिस आत्मीयता और उत्साह के साथ हिंदी कविता का मंच सजा, उसने यह साबित किया कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि साझा सांस्कृतिक चेतना है। सैकड़ों की संख्या में उपस्थित दर्शकों, अभिभावकों, शिक्षकों, साहित्य प्रेमियों और विद्यार्थियों ने पूरे समय प्रतियोगिता को जीवंत बनाए रखा।
गरिमामयी उपस्थिति और निर्णायक मंडल
कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना और युवा कथाकार तसनीम ख़ान की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष साहित्यिक गरिमा प्रदान की। निर्णायक मंडल में डॉ. इतु सिंह, सोफिया यास्मीन, डॉ. विकास कुमार साव, मंटू दास, डॉ. रीता चौधरी, प्रशांत रमण रवि, राज्यवर्द्धन, पिंकी साव और अमन शेखर जैसे साहित्य, रंगकर्म और शिक्षा से जुड़े प्रतिष्ठित नाम शामिल रहे। निर्णायकों ने उच्चारण, भाव-प्रेषण, मंचीय अनुशासन और पाठ की समझ के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया।
उद्घाटन वक्तव्य: भाषा से आंदोलन तक
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्रशांत रमण रवि ने कहा कि “हिंदी मेला महज़ एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और विचार का सतत सांस्कृतिक आंदोलन है, जो पीढ़ियों को जोड़ता है।” डॉ. अनिल त्रिपाठी ने मंच से बच्चों की प्रस्तुति की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि सैकड़ों दर्शकों के सामने नौनिहालों का निर्भीक और सधा हुआ पाठ इस बात का प्रमाण है कि हिंदी का भविष्य सुरक्षित और सशक्त हाथों में है। महेश आलोक ने रेखांकित किया कि हिंदीत्तर प्रदेश में इस तरह का आयोजन पूरे देश के लिए भाषाई प्रेम, समावेश और सांस्कृतिक सौहार्द का संदेश देता है।
शिशु वर्ग: आत्मविश्वास और भावनात्मक परिपक्वता
शिशु वर्ग की प्रस्तुतियाँ पूरे कार्यक्रम का भावनात्मक केंद्र रहीं। छोटी उम्र के बच्चों ने जिस स्पष्टता, लय और भाव के साथ कविताओं का पाठ किया, उसने मंच और दर्शक दीर्घा के बीच एक सहज संवाद स्थापित किया।
- शिखर सम्मान रक्षित चौधरी (हरा प्रसाद प्राइमरी) को प्रदान किया गया।
- प्रथम स्थान संयुक्त रूप से यशवीर गुप्ता (भोलानंदा नेशनल एकेडमी) और अभिनव दास (सेंट ल्युकस डे स्कूल) को मिला।
- द्वितीय स्थान भव्य जायसवाल (गुरुकुल ग्लोबल) और आद्या पाठक (चिल्ड्रेन फाउंडेशन) को मिला।
- तृतीय स्थान अर्चना पांडेय (गुरुकुल गरीफा आरती अकादमी) को प्राप्त हुआ।
इसके अतिरिक्त विशेष पुरस्कारों में समरादित्य सेन गुप्ता, शिवम साहा, ऋत्विक साव, अध्याय पांडेय, अनन्या यादव, श्रेया साव, रुद्रांश दीक्षित, अभिलाषा मिश्रा और वनीशा मिश्रा सहित कई प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
काव्य आवृत्ति ‘अ’ वर्ग: अभ्यास और संवेदना का संतुलन
इस वर्ग में प्रतिभागियों ने कविता की अर्थ-गहराई और मंचीय प्रस्तुति के बीच संतुलन साधते हुए प्रभावशाली पाठ किया।
- शिखर सम्मान: अनन्या कुमारी (सेंट ल्युक्स डे स्कूल)
- प्रथम: अरात्रिका मंडल
- द्वितीय: आरित पाणिग्रही (इंडस वैली वर्ल्ड स्कूल)
- तृतीय: सोनाली साव (हाजीनगर आदर्श हिंदी हाई स्कूल)
विशेष पुरस्कार अलिशा आर्य, रिद्धिमा घोष, अंजलि सेठी, त्विशा नवलगरिया, रूआब हसन, पुष्पा कुमारी पंडित, नेहा कामत और तनु साव को प्रदान किए गए।
काव्य आवृत्ति ‘क’ वर्ग: वैचारिक परिपक्वता और मंचीय अनुशासन
विश्वविद्यालय और महाविद्यालय स्तर के इस वर्ग में कविता का वैचारिक पक्ष और भावनात्मक प्रस्तुति विशेष रूप से प्रभावशाली रही।
- शिखर सम्मान: संजना जायसवाल (बेथुन कॉलेज)
- प्रथम स्थान: फरहान अज़ीज़ (प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय)
- द्वितीय स्थान: मो. अरबाज ख़ान (ऋषि बंकिम चंद्र कॉलेज)
- तृतीय स्थान: मौली मुखर्जी (विद्यासागर विश्वविद्यालय)
विशेष पुरस्कार सोहानी भगत, राणा प्रताप राय, नंदिनी साहा, स्वीटी कुमारी महतो, सुमित्रा चौहान और सत्यम पांडेय को मिले।
संचालन, धन्यवाद और आयोजन सहयोग
कार्यक्रम का सुस्पष्ट और गरिमामयी संचालन डॉ. सुमिता गुप्ता, शिखा सिंह, नमिता जैन, कुसुम भगत, मनीषा गुप्ता और सुषमा कुमारी ने किया। अनीता राय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी प्रतिभागियों, अभिभावकों, निर्णायकों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
आयोजन को सफल बनाने में सुरेश शा, विकास जायसवाल, सुशील कुमार पांडेय, फूलचंद्र राम, सूर्य देव रॉय, लक्ष्मी यादव, टीना परवीन, स्वीटी कुमारी महतो, प्रियांशु ठाकुर, प्रिंशु ठाकुर और अजय पोद्दार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
What's Your Reaction?

